सतना में सीवर लाइन के बाद हुए रोड रेस्टोरेशन की गुणवत्ता पहली बारिश में ही उजागर हो गई। स्टेशन रोड पर सड़क धंसने से निर्माण कार्य, निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
सतना के स्टेशन रोड पर भारी जाम से पौन घंटे तक यातायात ठप रहा। एम्बुलेंस फंसी रही, यात्री ट्रेन पकड़ने दौड़े। ट्रैफिक व्यवस्था की लापरवाही और अव्यवस्था ने शहरवासियों को परेशान कर दिया।
सतना में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। रात में बनी डामर सड़क का सुबह उखड़ जाना नगर निगम और संविदाकारों की कार्यशैली पर गंभीर आरोप खड़े करता है। आठ करोड़ की स्टेशन रोड परियोजना से लेकर 10 करोड़ की डामरीकरण योजना तक सब पर भ्रष्टाचार और अनियमितता की गूंज।
सतना शहर की सड़कों की हालत जर्जर हो चुकी है। गड्ढों और पानी से भरी गलियां दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं। ओवरब्रिज से लेकर सिविल लाइन और स्टेशन रोड तक हर रास्ता एक्सीडेंटल जोन बन गया है। नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से जनता त्रस्त और व्यापार चौपट है।
सतना का रेलवे माल गोदाम बीते एक दशक से ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बना हुआ है। भारी ट्रकों की आवाजाही से स्टेशन रोड अराजकता का शिकार है। 12 वर्षों से शिफ्टिंग की बातें हो रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। व्यापारी और जनता दोनों परेशान हैं।

















